suyash

Monday, September 14, 2015

बारूद का खूनी खेल

मौत के साथ दफन हो जाती है कार्यवाही
लखनऊ।(सुयश मिश्रा) राजधानी में बारूद का खूनी खेल बदस्तूर जारी है, लेकिन पुलिस व प्रषासन जोखिम के इस कारोबार को लेकर कितना संजीदा है इसका पता रविवार को पारा इलाके में हुए ब्लास्ट से लगाया जा सकता है। दिवाली करीब है लेकिन अवैध पटाखा फैक्टरियों पर नकेल कसने में जिम्मेदारों की नाकामी जग जाहिर है। पटाखों का अवैध कारोबार आबादी के बीचो-बीच बड़ी आराम से फल-फूल रहा है, ज्यादा पैसो की लालच में बिना लाइसेंस के ही चल रहा यह कारोबार हर साल अपने साथ कई को मौत की नींद सुला जाता हैं।
 
रविवार को एक बार फिर पारा इलाके में हुए बिस्फोट में तीन की मौत हो गई। दिल दहला देने वाली इस घटना से एक बार फिर प्रषासन के कान खड़े कर दिये हैं। आबादी के बीच हुए इस धमाके में जहां तीन जाने गई वहीं आस-पास के मकानों की दीवाले तक हिल गईं, जिस कारण लोगों में दहसत बन गई है।
 
पिछले तीन वर्षों में बारूद के इस व्यापार ने 29 जिन्दगियां निगल ली हैं। बीते साल 20 सितम्बर को मोहनलालगंज के सिसेंडी गांव में अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से करीब 16 लोगों की मौत हो गयी थी। जिसके बाद डीएम ने इस अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए कमर कसी और आनन-फानन में इलाके में छापेमारी शुरू हुई थी जिसमें तीन दर्जन से ज्यादा देषी पटाखा कारोबारियों के लाइसेंस रद्द कर दिये गये थे, लेकिन धीरे-धीरे प्रशासन भी सुस्त हो गया और अवैध पटाखा फैक्ट्रियां फिर गुलजार हो गयीं।
 
ज्यादा पैसों के लालच में शहर के बीचो-बीच बस रहा यह व्यापार हर साल वारदातों को न्योता देता रहा है। अब देखना यह है कि रविवार को हुई तीन मौतों से शुरू हुआ यह सिलसिला यहीं खत्म होगा या फिर अभी और जिन्दगियों की आहूति होगी।
 
इन इलाकों में सक्रिय है मौत का यह कारोबार
 
मौलवीगंज, सिसेंडी, मोहनलालगंज, गोसाईगंज, अमेठी, चिनहट, जैतीखेड़ा, मल्हौर इलाकों में यह बाजार सज रहा है। 
 
पिछले कुछ सालों में हुए हादसे
साल 1998 में राजधानी के सीसेंडी में पटाखा बनाते समय हुए हादसे में तीन की मौत, एक घायल।
 
20 अक्टूबर 2004 गोसाईगंज में विस्फोट से एक की मौत।
20 मई 2008 को जैतीखेड़ा में हुए हादसे में एक की मौत।
28 सितंबर 2006-चिनहट में पटाखे के गोदाम में आग, एक की मौत।
 
17 अक्टूबर 2009 मल्हौर में पटाखे की बोरी में विस्फोट से दंपती की मौत।
 
28 सितंबर 2012 पारा के बादलखेड़ा गाव में पटाखा गोदाम में विस्फोट होने से दो किशोरियों की दर्दनाक मौत।
20 सितम्बर को मोहनलालगंज के सिसेंडी गांव में अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से करीब 16 लोगों की मौत हो गयी।

http://tarunmitra.in/news.php?id=11291&title=Powder%20bloody%20game#.VfbVu9Kq
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Posted by मोहनलालगंज लोकसभा सीट: कोई नहीं बनना चाहता चाणक्य at 7:13 AM No comments:
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